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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 277, कुल 704 में से

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पृष्ठ 277

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स्मरण रहे कि थोड़ी सी थकावट और सुस्ती जो थोड़ी देर
के वास्ते जान पड़ती है उस में वेण्तलाली (अधिकता) जाहिर
नहीं होती। न यह अस्वास्थ्यकर होती है। दुग्धादि से वह सुस्ती
भी मिट जाती है। जब भोग के पीछे शिर में दर्द होने लगे तो
यह अत्यन्त दुर्बलता का लक्षण है इन नियमों पर ध्यान करने से
और सोचने विचारने से ज्ञात होगा कि प्रति सैकड़ा ९९ मनुष्य
उचित सीमा से बढ़ कर संभोग करने के कारण कैसे २ रोगों में
फंस रहे हैं। आज कल के दुर्बलों के लिये कुछ महीनों के पश्चात
सीमा अन्त कहा जा सकता है। लाखों स्त्रियों के इलाज से उनकी
जबानी मालूम हुआ है कि विषयी लोग नाना तरह के कष्ट उठाते
हुए भी इतनी देर संताप न कर सकें यह उनकी इच्छा है। परन्तु
चाहिए यह कि स्वास्थ्य ओर आनन्द की ओर पग धरें अथवा रोग
और दुःख की ओर दौड़ते जायें। विषयी पुरुषों के वास्ते जो किसी
की नहीं सुना करते हैं उनमें इतना ही निवेदन है कि महीने में
एक दो बार सन्तान उत्पत्ति के लिये गर्भाधान करें जब कि स्त्री
ऋतुवती होकर शुद्ध हो। अन्यथा शीघ्र ही हाथ मल कर