विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५४ आनन्द मन्दिर
दिस्तीर्णे सजले सुधाधवलिते चित्रादिनालङ्कृते।
रम्यप्रोन्नतचत्वरेऽगुरुमहाधूपादि पुष्पान्विते ॥
अर्थात्—लम्बा चौड़ा स्थान (मकान) हो तात्पर्य यह है कि
जहा वायु भलीभांति आता जाता रहे। जहां जल भी हो और
वह स्थान सफेदी से पुताया गया हो तथा भांतिभांति के चित्रों
से सजाया गया हो, चित्त को प्रसन्न करने वाले शोभायमान
पदार्थों से सुशोभित हो रहा हो, ऊंची छत और ऊंचा आंगन
हो, अगर आदि धुनी से धूपित किया गया हो, जिसमें चित्त को
प्रसन्न करने वाली मन्द मन्द सुगन्धि आ रही हो और भांति
भांति के सुगन्धित फूलों की मालाएं रक्खी हों।
सङ्गीताङ्गविराजते स्वभवनेदीपप्रभाभासुरे ।
निशङ्कं सुरतं यथाभिलाषितं कुर्यात्समंकान्तया ॥
संगीत के अनेक वाजे रक्खे हों और दीपक से प्रकाशमान
हो, ऐसे सुरमणीक स्थान में निःशंक होकर अपने घर मे अपनी
प्यारी भार्या से नियम पूर्वक दाम्पत्य प्रेम का आनन्द भोग करे।
तात्पर्य
इस प्रकार से संयोग करना इस कारण बतलाया है कि जो
अधिक दिनों तक ब्रह्मचर्य से न रहसके वे इस नियम के अनुसार
संभोग करें तो एकदम निर्बलता न होगी और कुछ हानि न
होगी। इस कारण बतलाया है—