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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १५५
निदाघशरदोर्बालाहिता विषयिणो मता ।
तरुणी शीत समये प्रौढा वर्षा वसन्तयोः ॥
इसका अर्थ यह है कि जो पुरुप ब्रह्मचर्य से अधिक दिन तक
नहीं रह सकते वे या जिनकी स्त्री की अवस्था थोडी है अर्थात्
१६ वर्ष की है, वे गरमी की ऋतु मे तीन तीन दिन पर संभोग
करे और जिनकी स्त्री तरुणी है अर्थात् ३२ बत्तीस वर्ष के भीतर
जिसकी अवस्था है वे. जाडे की ऋतु मे समोग करे और
जिनकी स्त्री की प्रौढ़ा अवस्था है वे वर्षा और वसन्त ऋतु में
संभोग करें। गरमी की ऋतु और शरद् ऋतु में बाला स्त्री
हितकारी है । तरुणी स्त्री शीतकाल मे हितकारी है और
प्रौढ़ा वर्षा तथा वसंत ऋतु मे हितकारी है ऐसा किसी किसी
ऋषि का मत है ।
बाला स्त्री से संभोग करने से बलकी हानि नहीं होती। तरुणी
स्त्री से नित्य संभोग करने से शरीर की शक्ति शीण होती है और
प्रौढ़ा स्त्री से सभोग करने से वृद्धावस्था आती है और वृद्धा स्त्री
से संभोग करने से मृत्यु आती है। इसलिये वृद्धा स्त्री से जो
अपने प्राणों की रक्षा चाहे वे सभोग न करे तथा नियम के विरुद्ध
न करे। नियम के विरुद्ध सभोग करने अथवा प्रौढ़ा वृद्धा स्त्री से
संभोग करने तथा तरुणी स्त्री से नित्य करने से शरीर की इन्द्रियां
शिथिल हो जाती हैं इस लिये वृद्धावस्था शरीर पर अपना
प्रभाव बहुत शीघ्र जमालेती है ।