विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र १५३
वर्जित समय
नोपेयात्पुरुषो नारीं सन्ध्यायोर्न च पर्वसु ।
गोसर्गेचार्धरात्रे च तथा मध्यं दिनेपि च ॥
दोनो समय की सन्ध्या अर्थात् सायंकाल और प्रात काल
तथा पर्व अमावस, पूर्णमासी, संक्रान्ति, चौदस, एकादशी इत्यादि
इसी प्रकार के जितने पर्व हैं उनमे सम्भोग न करे और जिस
समय गौ चरने को छोड़ी जाती हैं उस गोधूलि के समय, अर्ध-
रात्रि के समय तथा मध्यान्ह के समय पुरुष को स्त्री सम्भोग नही
करना चाहिये ।
दाम्पत्य विहार का योग्य स्थान
विहारं भार्यया कुर्याद्देशेतिशयसावृते ।
रम्ये श्राव्याङ्गनागाने सुगन्धे सुखमारुते ॥
पुरुष को अपनी ही स्त्री के साथ विहार करना चाहिये । जो
स्थान अन्य मनुष्यो के दृष्टिगोचर न हो अर्थात् एकान्त हो तथा
रमणीक स्थान हो । जिस कमरे मे स्त्रीगान कर रही हो और
सुगन्धित तथा सुखदायक पवन आती हो ऐसी जगह अपनी
भार्या के साथ विहार करे । ऐसे