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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 248

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १५१


नियमों की हो तो भेज दीजिए अथवा पत्र द्वारा सूचित कीजिए
ताकि हम अपने पति को वे नियम दिखला सकें।
इस प्रकार के पत्रों का यथार्थ उत्तर देने से उनके पतियों के
पत्र आते हैं कि ये तो बड़े कठिन नियम हैं, इतने दिन तक
ब्रह्मचर्य से आज कल के समय में कौन रह सकता है, तब उनके
पत्र का विवशतः उत्तर दिया जाता है कि जब तक रहा जावे रहो
और एक दिन भी न रहा जावे तो अपनी इच्छानुसार करो। ऐसे
अज्ञानी विषयी पुरुषों के लिये कोई नियम नहीं हैं।
यहां यह बात याद रखने की है कि प्रति दिन प्रसंग
करने वाला अथवा सप्ताह में प्रसंग करने वाला कुछ दिन बाद
इस दशा को पहुंच जावेगा कि महीने में भी एक दिन न कर
सकेगा और प्रति दिन करने वाला वर्ष भर मे भी एक दिन न
कर सकेगा क्योंकि अधिक प्रसंग से अन्य अनेक रोग उत्पन्न
होने के अतिरिक्त पुरुष नपुंसक भी हो जाता है तब वह महीने
तथा वर्ष भर में भी एक बार नहीं कर सकता। यही कारण है
कि आजकल तमाम अखबारों में तिला आदि के विज्ञापनों की
भरमार रहती है। मेरे पास भी नपुंसक पुरुषों की स्त्रियों के पत्रों
की संख्या कम नहीं रहती।

ऋतु विचार पूर्वक सम्भोग

यदि पुरुष ऋतुधर्म्म होने के बाद अपनी ही स्त्री से सम्भोग
करे तो भी पन्द्रह दिन तक संभोग का समय रहता है। ऋतुस्नान