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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 247

१५० आनन्द मन्दिर
तो नपुंसक सन्तान उत्पन्न होती है यह मेरी निश्चित मति (राय)
है। ऐसा शास्त्रकारों का कहना है।
स्त्री सम्भोग का अर्थ
स्त्री सम्भोग का अर्थ यही है कि स्त्री पुरुष दोनों का भोग
सम अर्थात् बराबर हो। यही दाम्पत्य प्रेम का आनन्द है, न कि
स्त्री रोगों से ग्रसित, दुःखों से पीडित हो और पति अपनी कामाग्नि
शान्ति के लिये उसपर अत्याचार करता रहे, उसके रोगों की कुछ
भी परवाह न करे। इसका परिणाम यह होता है कि पत्नी
कुछ दिनों में तपेदिक आदि भयकर रोगों में ग्रसित हो काल
का कलेवा बनजाती है अथवा पतिदेव ही ऐसे भयंकर रोगों
का शिकार बनजाते हैं और पत्नी का जीवन नष्ट कर डालते हैं।
ऐसे पुरुषों को सम्भोग का अर्थ समझ कर उसका पालन
करना चाहिये। जो सज्जन पति शब्द का अर्थ समझते हैं वे पत्नी
के साथ कभी इसके विरुद्ध आचरण नही करते । ऐसे ही पति
पत्नी दाम्पत्य प्रेम का आनन्द भोग करते हैं। उन्हीं की सन्तान
आरोग्य और सुन्दर होती है। वे भी पति पत्नी आरोग्यता और
दीर्घजीवन प्राप्त करते हैं परन्तु ऐसे पुरुष इस समय बहुत
कम मिलेगे।
स्त्री संभोग का नियम
प्रायः मेरे पास इस विषय के अनेक पत्र मित्रों के आया
करते हैं कि सम्भोग के नियम क्या हैं ? यदि कोई पुस्तक इस प्रकार के