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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 217

१३० आनन्द मन्दिर
जब एक ऋतु समाप्त होकर दूसरी आरम्भ होती है तब वात पित्त
कफ इन तीनो दोषो का क्रमशः धीरे धीरे कोप और शान्ति
होती है इसलिये धीरे धीरे आहार विहार का पहिला नियम छोड़
कर दूसरे का आरम्भ करना चाहिये ।
यदि ऋतुओ का आरम्भ देरी से हो तो देरी से ही आहार
विहार का नियम बदलना चाहिये । मान लीजिये जाड़े की ऋतु
व्यतीत हो जाने पर भी गरमी नही आई और जाड़ा ही है तो
आहार विहार नही बदलना चाहिये ।
नियमित ऋतु के अनुकूल आहार शास्त्र के सम्बन्ध मे
हमारा "पाकशास्त्र" मगाकर पढ़िये । हमारा पाकशास्त्र ५० हजार
की तादाद मे विक चुका है कितने ही संस्करण हो चुके हैं। सब
से पहले आयुर्वेद के अनुसार हमने ही आहार शास्त्र पाकशास्त्र
लिखा था। हमारे देखा देखी अब कितने ही पाकशास्त्र निकले
है पर हमारे पाकशास्त्र का मुकाबला नही कर सके हैं।
और दूसरो का मूल्य भी अधिक है। प्रत्येक वस्तु के संबन्ध मे
स्वास्थ्यकर जितना जिस प्रकार का ज्ञान आवश्यक है, सब
हमारे पाकशास्त्र मे दिया गया है । हमारे पाकशास्त्र मे साधार-
णतया विहार पर भी अच्छा प्रकाश डाला गया है ।