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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 216

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १२६
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शरद् ऋतु

शरद् ऋतु में चरपरे स्वादिष्ट और कसैले रसो के पदार्थ
प्रति दिन के भोजनो मे अवश्य खाने चाहिये ।

ऋतुओं के अनुसार
आहार विहार का संक्षिप्त वर्णन

जो मनुष्य सदैव आरोग्य रहना चाहे उनकी आरोग्यता के
लिये हमारे प्राचीन ऋषियो ने आहार विहार के नियम बना दिये
हैं। जब से इस बातका लोगो को ध्यान नही रहा तब से देश में
अनेक रोगों ने डेरा जमालिया, लोग देश का आहार विहार छोडकर
विदेशी आहार विहार का अभ्यास करने लगे। आहार विहार सदैव
अपनी ही जन्म भूमि का आरोग्यता के लिये हितकर होता है उस
के विरुद्ध चलने से अनेक रोगो की उत्पत्ति होती है यही ऋषियों
ने बतलाया है ।

वात पित्त कफ का कोप और शान्ति

जब एक ऋतु समाप्त होकर दूसरी आरम्भ हो तब पहिली
ऋतु के अहार विहार में धीरे धीरे हेर फेर करदेवे और पहला
क्रमशः छोड़ता जावे फिर नई ऋतु का आहार विहार करने लगे ।
इस प्रकार नियस से चलने से प्रति दिन के आहार विहार की
भूल से जो रोग उत्पन्न होते हैं वे नही होने पाते ।

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