विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३६ आनन्द मन्दिर
भोज्याः लदा लोहितशालमुद्गा,
गव्यंघृतं चन्द्रकराश्च सेव्याः ।
इक्षोर्विकारा मरिचैश्च भक्ष्याः,
पथ्या सिताढ्या किल सेवनीया ॥
भोजन मे प्रति दिन लाल चावल का भात, मूंग, गायका'
घी, गुड़, मिश्री वतासे आदि और काली मिर्च मिले पदायौँ का
सेवन करना चाहिये और हर्ड का चूर्ण मिश्री मिलाकर सेवन
करना हितकारी है ।
स्थितिः प्रवत्ते रजनीषु कार्या,
घर्मश्च नित्यं परिवर्जनीयः ।
छाया च सेव्या हरितद्रुमाणां,
श्रमं न कुर्यात्प्रयतो मनुष्यः ॥
चन्द्रमा की चांदनी का सेवन हितकारी है । छाये हुए स्थान
में रहना, और धूप से बचते रहना चाहिये हरे हरे वृक्षों
की छाया का सेवन करना चाहिये और इस ऋतु में परिश्रम नहीं
करना चाहिये ।
भूयान्नरः शरदि चन्दनलिप्तगात्रः,
स्त्री शर्कराकथित दुग्धयुता च सेव्या ।