सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 210, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 210

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १२५
का शाक, करेले, पालक, सिंघाड़े कसेरू का शाक और भैंस का
दूध हानि कारक है ।
कुसमय भोजन करना, दौड़कर चलना, आगके सामने बैठना,
भारी बोझा उठाना, रात को जगना, डकार, छींक और मल, मूत्र,
उलटी, आंसू आदि रोकना हानि कारक है, इन कारणों से वायु
विकार को प्राप्त होता है जिससे अनेक रोग उत्पन्न होते हैं । इस-
लिये हानिकर पदार्थों से बचना चाहिए ।
इसलिये आरोग्यता चाहने वालों को वर्षा मे बड़ी सावधानी
से रहना चाहिये ।
शरद् ऋतु का आहार विहार
( आश्विन और कार्तिक शरद ऋतु )
पित्तेन सान्द्रं रुधिरं शरत्सु,
वृद्धिं समागच्छति सूर्यरश्मिभिः ।
तदाशु रक्तं परिमोक्षणीयं,
पानेजलं सारसमुद्दिशन्ति ॥
अर्थात्—पित्त से गाढ़ा हुआ रक्त, शरद मे सूर्य की किरणो
से पिघलकर बढ़ता है इसलिये रुधिर को शान्त करने के लिये
फस्त खोलाना चाहिये ऐसा वैद्यकशास्त्र मे ऋषियों का मत है ।
इस मे नदीं या तालाब का पानी चाहिये ।