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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १०७

बड़ी हर्र कूट पीस कपड़ छानकर तीन तीन या छै छै मासा
की पुड़िया बना रक्खे। प्रतिदिन रात को सोते समय एक एक
तोला गुड़ मिलाकर खालेवे ऊपर से पानी या गाय का दूध
पीलेवे। इससे प्रति दिन पाखाना साफ होता है और भूख खूब
लगती है शरीर आरोग्य और फुर्तीला रहता है।
अदरख, लौंग, सोंठ, कच्चे आम, अथवा आमला या कैथा
की चटनी, पीपर, सौंफ, मेथी, कमलगट्टा, चौलाई का शाक, धनियां,
कालीमिर्च, हींग, घी, दूध की खीर, परवल की तरकारी, अरहर
मूंग की दाल अथवा खड़ी मूंग, पुराने चावल, पुराने गेहूँ की
रोटी ये सब पदार्थ प्रति दिन हेर फेर कर सेवन करने चाहिये।
चीते की छाल, सेंधा नमक, इलायची, जायफल, चूके का
शाक, दही, मट्ठा, जिमीकंद, मुनक्का, जलेबी, हलुवा, आदि पदार्थों
का सेवन इस ऋतु मे अत्यन्त हितकारी है।
मूली की तरकारी, जभीरी, अनार, अंगूर, सेव, बादाम,
अखरोट आदि हेमन्त ऋतु मे हितकारी हैं। गेहूं का दलिया, सांठी
के पुराने चावल तथा लाल चावलों का भात नदी या कुए का
पानी यह सब हेमन्त ऋतु मे हितकारी है।
हेमन्त ऋतु के हानिकारक पदार्थ
सिंघाड़े, कसेरू, नाड़ी का शाक, केला की फली, उड़द,
आलू, घिया तोरई, भैंस का दूध, मट्ठा, दहीवड़ा ये सब हेमन्त
ऋतु में हानि कारक हैं। इस ऋतु मे इनका सेवन न करे।