सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 181, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 181

१०६ आनन्द मन्दिर
हेमन्त ऋतु का आहार
हेमन्त ऋतु मे शीत के कारण उपरी शरीर की गरमी
भीतर रहती है इस कारण जठराग्नि ( पेट की गरमी पाचन शक्ति )
प्रबल रहती है। यदि इस ऋतु मे समय पर भोजन रूपी ईंधन
न मिले तो यह प्रबल होकर रस रक्त आदि धातुओ को पचाने
लगती है जिससे मनुष्य शीघ्र ही निर्बल दुर्बल और शक्ति
हीन होजाता है। हेमन्त मे समय पर जिस समय भूख लगी हो
अवश्य भोजन करना चाहिये और भोजनों मे स्वादिष्ट खट्टे और
नमकीन पदार्थ अवश्य होने चाहिये।
हेमन्त मे जठराग्नि के प्रबल होने से तथा रात्रि बड़ी होने
से प्रात.काल ही भूख लगती है अतएव प्रात.काल शौच आदि
कुल्ला दातौन से अवकाश पाकर कुछ खाकर तब अपने प्रति दिन
के काम में लगना चाहिये।
वैद्यकशास्त्र बतलाता है कि भूखा मनुष्य यदि समय पर
भोजन, न करे और भूख लगी रहने पर भी परिश्रम मे लगजावे
तो उसकी जठराग्नि ( पेट की पाचन शक्ति ) नष्ट हो जाती है
जैसे विना ईंधन के आग वुझजाती है वैसे ही विना भोजन के
परिश्रम करने से अथवा भूखे रहने से पेट की अग्नि वुझजाती है।
इसलिये सामर्थ्य के अनुसार प्रातःकाल कुछ खा लेना चाहिये।
हेमन्त से आरोग्य रहने के लिये गुड़ मे मिला हुआ हर्ड का
३ से ६ मासे तक चूर्ण प्रति दिन सेवन करना चाहिये।