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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 183

१०८ आनन्द मन्दिर
दिन मे सोना, उपवास करना, शीतल जल से स्नान करना,
बहुत देरी का रक्खा हुआ अन्न भोजन करना, हवा में बैठना,
शीतल जल पीना, एक ही समय भोजन करना, सत्तू खाना ओर
कसैले, कडुए, तीक्ष्ण, रूखे तथा हलके पदार्थों का सेवन करना,
जहां सूर्य का प्रकाश न पहुँचना हो ऐसे स्थान में रहना, ये हे
ऋतु में हानिकारक हैं। इसलिये शरीर की आरोग्यता
वालो को यह सब छोड़ देना चाहिये ।
शिशिर ऋतु का आहार विहार
(माघ ओर फाल्गुन शिशिर ऋतु)
सर्वं हिमोक्तं शिशिरे प्रयोज्यं,
पथ्या कणा तुल्यतमा च सेव्या ।
आभुज्य सेवेत जलं सुवोष्णां,
कान्तायुतो वास गृहे वसेत्तु ॥
जो पदार्थ हेमन्त मे सेवन करने, आहार विहार आदि
करने बतलाये हैं वे ही शिशिर मे भी सेवन करने चाहिये, इस
ऋतु में पीपल का चूर्ण मिलाकर हर्ड सेवन करनी चाहिये अन्य
सब वस्तुएं हेमन्त की ही समान सेवन करना हितकारी है।
सार्द्रकार्द्रा ससंधाना सबाह्लीका ससैंधवा ।
सस्नेहा कामिनी चेयं कृशरा शिशिरेहिता ॥