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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १०५
हेमन्ते दधिदुग्धसर्पिरशनामाजिष्ठवासोभृतः,
काश्मीरद्रवलिप्त चारुवपुषः खिन्ना विचित्रै रतैः।
वृत्तोरुस्तन कामिनी जनकृताश्लेषा गृहाभ्यन्तरे,
ताम्बूलीदलपूग पूरितमुखाधन्याः सुखंशेरते ॥
दही दूध तथा घी के नाना प्रकार के भोजन कर लाल रग
के वस्त्र धारण कर, केशर का लेप शरीर मे लगाए हुए, दाम्पत्य
प्रेम के आनन्द भोग और सभोग से थकित, युवती पत्नियो के
हाथ का बीडा और पान सुपारी आदि से जिनका मुख शोभाय-
मान है ऐसे वड भागी पुरुष इस हेमन्तऋतु मे सुख पूर्वक शयन
करते हैं ।
हेमन्त ऋतु का स्नान
इस ऋतु मे तैल की मालिस समस्त शरीर में कराकर गरम
जल से स्नान करना चाहिये, तैल की तमाम शरीर मे मालिस
करके स्नान करना शरीर को पुष्ट करता है और धातु न्योज तथा
तेज की वृद्धि करता है। कान और आँख की शक्ति को बढाता
है। परमात्मा