सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 152, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 152

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ८७
वर और कन्या की प्रकृति नाड़ी वर्ग और शुभाशुभ लक्षण
मिलाकर विवाह होता है परन्तु फिर भी कुछ न कुछ मिलान रह
जाता है जिसका परिणाम आगे चलकर बुरा होता है। प्रकृति आदि
न मिलने से स्त्री पुरुष मे कलह रहती है। प्राचीन समय मे जन्म
पत्र का ठीक ठीक मिलान करके विवाह होता था। कुछ समय से
धर्म्म सम्बन्धी सभी बातो मे कमी और असावधानी होने लगी है
इसी प्रकार विवाह आदि मे भी होती है इसलिये ठीक मिलान
न कर पति पत्नी की प्रकृति और स्वभाव आदि न मिलने से नाना
प्रकार के कष्ट होते हैं और दाम्पत्य प्रेम का जैसा चाहिये
आनन्द नहीं मिलता।
आजकल प्रथम तो जन्म पत्र ही ठीक नही वनते। वच्चे
वाले पंडित को बच्चे के पैदा होने का समय अन्दाज से वतलाते
हैं क्योंकि प्रायः घड़ी बहुत कम घरों मे होती है। इसलिये बहुत
कम घर ऐसे होते हैं जिनमे जन्म समय का वक्त बिलकुल ठीक
देखकर जन्म पत्री बनाई जाती होगी। दूसरे जन्म पत्री बनाने
मे जितने पाण्डित्य की आवश्यकता होती है उतनी विद्वत्ता पण्डित
मे होती नहीं। वे अट संट जो समझते हैं, वना देते हैं। इसके
बाद जन्म पत्री के मिलाने वाले भी बहुत कम मिलान करते हैं
वे केवल अपने मतलब साधन की बात सोचते हैं। यही कारण
है कि आजकल जन्म पत्री का मिलान करके भी व्याह होने पर
अधिकतर उसका परिणाम विपरीत होता है। जिस दाम्पत्य प्रेम के
लिये जन्म पत्री मिलाई जाती है वह दाम्पत्य प्रेम नष्ट होजाता है।