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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 151

८६ आनन्द मन्दिर
कामशास्त्र के ही अन्तर्गत विवाह विज्ञान है। हमारे देश में
ऋषियों ने बड़े विचार के साथ विवाह करना वतलाया है क्योंकि
विवाह बन्धन मनुष्य की आयु पर्यन्त ही नहीं कई पीढ़ियों से
सम्बन्ध रखता है इस कारण बहुत विचार करने की आज्ञा है।
विवाह का नियम जो भारतवर्ष मे है वह ससार में कहीं नहीं है।
विवाह बन्धन अन्य देशो मे बन्धन नहीं समझा जाता, न वहा
इतनी देख रेख ओर विचार ही किया जाता है। विवाह हो जाने
पर भी जब स्री चाहे पति को छोड़ सकती है विवाह होने के
पहिले जिन गुणो के कारण पुरुष को पसन्द करके स्री ने उसे
अपना जोड़ा मिलाया था विवाह होने के बाद यदि उसमें कुछ
कमी आगई तो स्री पति को छोड़ देती या छोड़ सकती है। पति
भी इसी प्रकार छोड़ सकता है परन्तु पति के लिये कुछ कठिनाई
होती है।
जिन देशो अथवा जिन जातियो मे विवाह का कोई शास्त्र
सम्मत नियम नहीं है वहां तथा उन जातियो मे पत्नी जब चाहे पति
को छोड़ सकती है परन्तु भारतवर्ष की उच्च जातियो में विवाह का
बड़ा भारी महत्व है इसलिये यहां पति को पत्नी छोड़ नहीं सकती।
जिन जातियो मे छोड़ने का रिवाज है उन मे भी बिरादरी का दंड
आदि बड़ी कठिनाई पड़ती है। भारतवर्ष के प्राचीन पुरुषों ने
विवाह के विषय में पहिले ही इतना विचार रक्खा है कि विवाह
बन्धन टूट न सके। इसीलिये जन्मपत्र के अनुसार अनेक बाते
मिलाई जाती हैं।