विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ८३
अपने प्राणप्यारे पति की मृत्यु का पतिप्राणा स्त्रियों को
जो दुःख होता है उसे देखने वालों का भी हृदय फटने लगता
है क्योंकि संसार में स्त्रियों के लिये पति से बढ़कर कोई दूसरा
प्यारा नहीं है। विलाप करते करते रति सती होने को तैयार हो
गईं, कामदेव तो जलकर भस्म होगया था, शरीर का वहां नाम
निशान तक नहीं रहा था केवल राख रह गई थी, उसी को शरीर
में लगाकर वे सती होने को तैयार हुई। तब आकाश वाणी हुई
हे कामदेव की प्यारी स्त्री ! तुम अपने प्राणों को नष्ट मत करो
तुम्हारा पति कुछ दिन में फिर मिलेगा, सन्तोष रखो। पति के
विछोह का दुःख तुमको अधिक दिन नहीं भोगना पड़ेगा।
हे सुन्दरी ! शीघ्रही वह दिन आने वाला है जब
शिवजी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके साथ विवाह
करेंगे और विवाह करके प्रसन्न होंगे तब तुम्हारे पति कामदेव
को फिर से जीवित करदेंगे। तुम सन्तोष रखो। शिवजी देवों के
भी महादेव हैं, उन्हें मारने और जिलादेने की पूरी सामर्थ्य है।
इस समय तुम्हारा पति ब्रह्मा के शाप से शिवजी के क्रोध से
भस्म हुआ है वह फिर जीवित होगा। इस प्रकार आकाश वाणी
को सुनकर कामदेव की स्त्री रति को धैर्य हुआ। उसने सती
होने का विचार छोड़ दिया परन्तु पति के ध्यान मे शोकाग्नि से
दिन प्रतिदिन शरीर को क्षीण करती हुई उस दिन की प्रतीक्षा
करने लगी।
पार्वती की तपस्या पूरी हुई और शिवजी ने पार्वती से