विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८४ आनन्द मन्दिर
विवाह कर लिया। तब तक कामदेव को जो ब्रह्मा ने शाप दिया
था उसका समय भी पूरा होगया इसलिये सब देवताओ ने शिवजी
से प्रार्थना की हे शिव ! कामदेव को फिर से जीवनदान देकर
अपनी सेवा के लिये जीवित कीजिये नही तो ससार का काम
कैसे चलेगा, कामदेव मे ही मृष्टि की रचना संभव है इसलिये
इसका जीवित होना अत्यन्त आवश्यक है। शिवजी ने देवताओ
की प्रार्थना स्वीकर करके कामदेव को जीवित करदिया। कामदेव
की स्त्री रति पति को पाकर प्रसन्न हुई। इस प्रकार कामदेव
जीवित होकर सबको सताने लगा ऋषि मुनि तपस्वी योगी
यती देवता और मनुष्य तथा सभी जीवधारी कामदेव के वश
मे है।
जो मनुष्य कामदेव को अपने वश मे करके ईश्वर में ध्यान
लगाते है वे देवताओ की ईर्षा के कारण तप नही करने पाते।
जो अपनी इन्द्रियो को वश मे करके परमात्मा का ध्यान करते है
वे धन्य है। जो मूर्ख पुरुष स्त्री को दुःख देकर गृहस्थाश्रम से
निकल भागते है वे किसी ओर के नहीं रहते।
जो गृहस्थाश्रम मे रहते हुए परमात्मा का भजन करते है
वे इस लोक और परलोक दोनो मे आनन्द भोग करते हैं ऐसा
धर्मशास्त्रो मे ऋषियो ने कहा है। इसलिये किसी से भी घृणा
या विरक्ति का भाव दिखाना ठीक नही है। आजकल बहुतेरे
इसी तरह के संयमी ब्रह्मचारी, साधू दिखलाई पड़ते है जो-नारि
मुई घर संपति नासी, मूड मुड़ाये हुए सन्यासी।