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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 143

८२ आनन्द मन्दिर
कामदेव और शिवजी
शिवजी की पहिली स्त्री सती का देहान्त होजाने पर शिवजी
को बड़ा दुःख हुआ। इनका विचार फिरसे विवाह करने का न
था इसलिये पत्नी की मृत्यु के बाद वे तपस्या करने लगे। शिवजी
सब देवो के देव महादेव कहलाते है। उनकी शक्ति भी महान
है, इसलिये वे घोर तपस्या करने में लगगये।
कामदेव बड़े ठाट बाट के साथ अपनी स्त्री रति को लेकर
शिवजी का तप भग करने गया। शिवजी तपस्या में थे, पार्वती के
पिता ने पार्वती जी को शिवजी की सेवा के लिये भेजा था। जब
पार्वती शिवजी के पास पहुँची तो अच्छा अवसर देखकर कामदेव
ने शिवजी पर अपना वाण चलाने की तैय्यारी की। शिवजी को
मालूम होगया, उन्हे कामदेव पर बड़ा क्रोध आया। शिवजी के
तीन नेत्र थे, तीसरा नेत्र महान क्रोध आने पर वे खोलते थे। शिव ने
क्रोध से उसी तीसरे नेत्र से कामदेव की ओर देखा। नेत्र खुलते
ही उसमें से बडी विकट अग्नि की लपट निकली। उस लपट के
निकलते ही कामदेव भस्म होने लगा। उसकी स्त्री रति वहीं खड़ी
थी। रति अपने पति कामदेव को जलते देखकर पति के जीवनदान
की शिवजी से प्रार्थना करने लगी परन्तु जब कामदेव भस्म हो गया
तो रति अचेत हो पृथ्वी पर गिर पड़ी। वहुत देर के बाद जब
उसको होश आया तब वह विलाप कर रोने लगी। उसका विलाप
पत्थर के हृदय को भी पिघला देने वाला था।