विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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७६ आनन्द मन्दिर
विशोधितो येन हृदिच्छणांनो,
वृथागतं तस्य नरस्य जीवनम् ॥
अर्थात्—हे रम्भे ! सुनो, जिसका रूप हृदय मे चिन्तन
करने से भी ध्यान मे नही आता। जो सर्व शक्तिमान, सब जगह
विराज मान है। जो विश्वका पालन करने वाला, ज्ञान, मय, चैतन्य,
विश्व व्यापी, आनन्द का सागर है। ऐसे परमात्मा का जिसने क्षण-
मात्र भी अपने हृदय में ध्यान नही किया उसका जीवन व्यर्थ गया।
रम्भा बोली—
हे मुने ! आदि काल से ही यह नियम चला आता है कि
स्त्री का सुख स्वर्ग से भी अधिक है सुनिये.—
स्वर्गेऽपि दुर्लभं ह्येतदनुरागः परस्परम् ।
पति पत्नी का परस्पर प्रेम स्वर्गका भी दुर्लभ पदार्थ है जिसके
पत्नी नही है उसका जीवन व्यर्थ है ।
शुकदेव जी बोले—
चतुर्भुजश्चक्रधरो गदायुधः,
पीताम्बरः कौस्तुभ मालया लसन् ।
ध्यानेधृतौ येन न बोधकाले,
वृथागतं तस्य नरस्य जीवनम् ॥
अर्थात्—शुकदेव जी कहते हैं, चार भुजाओ वाले चक्रधारी