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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ७५
रम्भा और शुकदेव मुनि
एक समय व्यास जी के पुत्र शुकदेव मुनि तपस्या कर रहे
थे। इन्द्र को यह देखकर बड़ी ईर्षा उत्पन्न हुई। उन्होंने कामदेव
को बुलाकर शुकदेव जी की तपस्या भंग करने के लिये कहा. तब
कामदेव ने सलाह दी कि रम्भा नामक आप के यहां जो परम
सुन्दरी अप्सरा है, उसे भेजिये । इस कार्य को वह पूरा करेगी ।
राजा इन्द्र ने रम्भा को बुलाकर आज्ञा दी कि तुम जाकर
शुकदेव जी का तप नष्ट करदो। इन्द्र की आज्ञा पाकर रम्भा
सुन्दर शृंगार करके शुकदेव जी के पास आई। शुकदेव जी तपस्या
कर रहे थे, ब्रह्म के ध्यान में मग्न थे।
इन्द्र की भेजी हुई परम सुन्दरी रम्भा शुकदेव जी के पास
आकर सामने बैठ गई और शुकदेव जी का तप भंग करने के लिये
अनेक उपाय करने लगी। रम्भा बोली—हे मुने ! तप में क्या
रक्खा है तपस्या का फल स्वर्ग में नहीं है इसी लोक में मौजूद है।
जो सुख और आनन्द गृहस्थाश्रम में स्त्रियों से मिलता है वह
सुख स्वर्ग में कदापि नहीं मिलता, इस लिये तप करना व्यर्थ है।
शुकदेव जी बोले—
अचिन्त्य रूपोभगवन्निरञ्जनो,
विश्वम्भरो ज्ञानमयश्चिदात्मा ।