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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 133

७४ आनन्द मन्दिर
कामदेव चरित्र
हमारे देश की जितनी प्राचीन गाथाएं हैं वे किसी न किसी
प्रकार के लक्ष्य से खाली नही है उनका लक्ष्य भी उन्चे आदर्शों
से भरा हुआ है !
मनुष्य के हृदय मे कामोद्दीपन करने वाले ( जिसके वेग
से वीर्य स्खलित होता है ) देवता का नाम कामदेव है ।
यह ऐसा बलवान् है कि इसके सामने बड़े बड़े देवता ऋषि
मुनि भी हार मान गये हैं। जब कोई ऋषि मुनि घोर तपस्या
करने लगता है अपने जीवन को सुखमय और आनन्द मय
बनाने लगता है तब इन्द्र आदि देवताओ को यह ईर्षा उत्पन्न
होती है कि कही यह तपस्या के प्रभाव के फल से मेरा पद् न
छीन लेवे इसलिये इन्द्र आदि सब देवता इकट्ठे होकर उस तपस्वी
का तप भग कराने के लिये कामदेव की शरण लेते हैं। वे पहिले
तो अपने यहां की अप्सराओ को भेजते है। वे तपस्वियो के पास
जाकर अपने हाव भाव सुन्दरता श्रृंगार आदि से उनकी तपस्या
भंग करती हैं। यदि अप्सराओ का कोई उपाय न चला तब
अन्त मे वे कामदेव की शरण लेते है।
इस विषय मे अनेक मनोरञ्जक कथाए प्राचीन ग्रन्थो में पाई
जाती है। इस विषय मे, एक बड़ा ही मनोरञ्जक उदाहरण रम्भा
और, शुकदेव मुनि की कथा का है। प्रसग वश यहां रम्भा और
शुकदेव मुनि का कुछ वृत्तान्त लिखा जाता है.—