विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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उन्हें ऐसा दण्ड मिलता है कि वे पीछे पछताते हैं और बड़ा कष्ट
भोगते हैं। फिर उन्हें स्त्री प्रसंग का कुछ भी आनन्द नही
मिलता और दाम्पत्य सुख का आनन्द नष्ट होजाता है।
आयुर्वेद बतलाता है.—
पुनर्दाराः पुनर्वित्तं पुनः क्षेत्रं पुनः सुतः ।
पुनः श्रेयस्करं कर्म न शरीरं पुनः पुनः ॥
इसका अर्थ यह है कि स्त्री धन सम्पत्ति और जायदाद तथा
सन्तान इत्यादि संसार के सब पदार्थ फिर से मिल जाते हैं परन्तु
मनुष्य शरीर फिर फिर से नहीं मिलता। इसलिये इस बहुमूल्य
शरीर की रक्षा के लिये आरोग्यता का सदैव ध्यान रखना मनुष्य-
मात्र का परम कर्त्तव्य है।
बहुतेरे मनुष्य यह समझते हैं कि जब हम इस जन्म मे
अपने पूर्व कर्मों का फल भोग रहे हैं तो अच्छा बुरा जो कुछ
कर रहे हैं उससे क्यों रुके क्योकि वह तो पूर्व जन्म का फल
है जो रोकने से भी नही रुक सकता। वास्तव मे उनके ऐसे विचार
भ्रम पूर्ण और गलत हैं। उन्हे यह अच्छी तरह समझ लेना
चाहिये जैसा कि ऊपर बताया गया है कि बहुतेरे कर्मों का फल
इसी जन्म में मिलता है। फिर हम जो फल भोग रहे हैं वे पिछले
कर्मों के है और जो कर्म कर रहे हैं वे अगले जन्म के लिये।
इसलिये इस जन्म और अगले जन्म का विचार कर शुभ कर्म
ही करना चाहियें।