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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ७१
शुचिः सौधोत्सङ्गः प्रतनु वसनं पङ्कजदृशो ।
निदाघे तूर्णं तत्सुखमुपलभन्ते सुकृतिनः ॥
अर्थात्—अच्छी सुगन्धित माला, पंखे की वायु, चांदनी,
पुष्पों का पराग, तड़ाग, चन्दन, अच्छी ऊंची श्वेत घर की छत
और अच्छे मलमल के महीन वस्त्र तथा सुन्दर स्त्री इत्यादि पदार्थों
से पुण्यवान पुरुष ही सुख उठाते हैं ।
जो सब सुख होते हुए भी सुख भोग नहीं कर सकते उन्हें
शुभ कर्मों से रहित समझना चाहिए ।
ससार के बहुमूल्य पदार्थ हुए ही तो क्या ? सुन्दर स्त्री मिली
ही तो क्या ? यदि पूर्वजन्म से अथवा इस जन्म मे पुण्य नहीं किया,
शुभ कर्म नहीं किये तो सब व्यर्थ है। उनकी धन सम्पत्ति किस
काम की, नवयौवना सुन्दरी स्त्री घर मे मौजूद होते हुए भी रोगी
होने के कारण वे सुख नहीं भोग सकते ।
पाठकों ने अनेक ऐसे मनुष्यों को भी देखा होगा कि जो
आज सब प्रकार से सुख भोग कर रहे हैं परन्तु देखते ही
देखते थोड़े समय मे ही उनके वे सब सुख पीछे बतलाए हुए
कामक्रीड़ा की कलह से टूटे हार के मोतियों की समान सब सुख
छिन्न भिन्न हो गये। न वह धन सम्पत्ति रही न वे सुख रहे न
वह स्त्री रही फिर बतलाइये यह सब पुण्य क्षय का फल नहीं है
तो क्या है।