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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 127

उत्पन्न हो गये थे। छहों स्त्रियां रोगी हो गई थीं उसका कारण
वही था जैसा कि शास्त्रकारो ने बतलाया है:—
अमैथुनं जरा स्त्रीणामनध्वा वाजिनं जरे ।
अर्थात्—जिस स्त्री को कभी सभोग सुख नही मिलता अर्थात्
जिन्हे रतिक्रिया का आनन्द कभी नही मिलता वे स्त्रियां शीघ्रही
वृद्धा हो जाती हैं और उन्हे अनेक प्रकार के रोग आ घेरते हैं।
जैसे घोड़ा बधे रहने से अर्थात् घोड़े से मेहनत का काम न लेने
से वह बुड्ढा और रोगी होजाता है।
उन सब स्त्रियो के साधारण रोगो का जिनका इलाज हो
सकता था, करके आराम कर दिया गया परन्तु उनके पति को जवाब
दे।दिया क्योकि उन्हे रोग नही था पूर्व कर्मों का भोग था जोकि
उन्हे भोगना ही था।
इसी प्रकार के अनेक धनवान् जिन्हे किसी बात की कमी
न थी और जिनके दो दो तीन तीन रूपवती स्त्रियां भी थी परन्तु
'पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार वे उस धन सम्पत्ति के चौकीदार थे
इसलिये सुख भोग नही कर सकते । पाठको ने भी इस प्रकार
के अनेको धनवान् मनुष्य देखे होगे । ससार मे ऐसे उदाहरणों से
ही पता लगता है कि धन सम्पत्ति और सुन्दर स्त्री पूर्वजन्म के
पुण्य से ही भोग मे आती है। इसलिये पराई धन सम्पत्ति और
रूपवती स्त्री को देखकर चित्त को विचलित न होने देना चाहिये
उन्हे प्राप्त करने के लिये शुभकर्म करने चाहिये।