सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 129, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 129

७२ आनन्द मन्दिर
पूर्व जन्म और इस जन्म के शुभाशुभ कर्म
पूर्व जन्म के कर्मों को जाने दीजिये। इसी जन्म के कर्मों का
फल देखिये। जो पुरुष कोई बुरा कर्म करता है उसे इसी जन्म में
ही अनेक प्रकार के फल भोगने पड़ते हैं।
जो पुरुष धन की बेकदरी करके बुरे कर्मों में धन खर्च करते
हैं वे एक दिन निर्धन होकर अनेक प्रकार के कष्ट भोगते हैं और
एक एक पैसे को दूसरो के आगे हाथ फैलाते है, रोते पछताते
हैं। उनका जीवन बड़े कष्ट से व्यतीत होता है। इसी प्रकार जो
पुरुष शरीर के राजा कामदेव का अनादर करता अर्थात् बेकदरी
करके बुरे कर्मों में खर्च करता है। अर्थात् वीर्य को नष्ट करता
है उसे इसी जन्म में उसका फल भोग मिलता है।
कामदेव की बेकदरी करने से शरीर में अनेक प्रकार के रोग
उत्पन्न होजाते हैं जिससे नाना प्रकार के दुःख मिलते हैं। जो
पुरुष विवाह होते ही अनियमित स्त्री प्रसग करके वीर्य का सत्या-
नाश मारते हैं अर्थात् कामदेव का निरादर करते हैं अथवा विना
विवाह के ही कुसगति में पड़कर अनेक प्रकार के कुकर्मों से वीर्य
का सत्यानाश करते हैं वे अनेक प्रकार के रोगो में ग्रसित हो
जीवन भर दुख भोगते हैं।
जो पुरुष रात दिन विषयवासना की तृप्ति की ही इच्छा-पूर्ति
में लगे रहते हैं वे अपनी तथा अपनी स्त्री की आरोग्यता नष्ट करते
हैं और कामदेव जो शरीर का राजा है उसके बिगड़ जाने से