विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंघूम आये, पर कहीं भी उन्हें शरण न मिली। अन्तमें वह अम्बरीषके चरणोंपर
जाकर गिर पड़े। राजाने स्तुति करके चक्रको शान्त किया। इसके बाद भग-
वान्ने दुर्वासा ऋषिसे कहा कि तुम्हारे दिये हुए शापको मैं ग्रहण करता हूँ।
उनके स्थानपर मैं ही दस बार शरीर धारण करूँगा।
३—'उग्रसेन'—कंसके पिता और श्रीकृष्णजीके नानाका नाम था।
अत्याचारी कंसका वध करनेके बाद भगवान्ने अपने नाना उग्रसेनको राजगद्दी-
पर बिठाया और स्वयं वह उनके द्वारपाल बने।
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बिरद गरीब-निवाज राम को।
गावत वेद-पुरान, संभु-सुक, प्रगट प्रभाउ नाम को ॥१॥
ध्रुव, प्रह्लाद, विभीषन, कपिपति, जड़, पतंग, पांडव, सुदाम को।
लोक सुजस, परलोक सुगति, इन्ह में को है राम'काम को ॥२॥
गनिका, कोल, किरात, आदिकवि, इन्हते अधिक वाम को।
बाजिमेध कव कियो अजामिल, गज गायौ कव साम को ॥३॥
छली, मलीन, हीन सब ही अँग, तुलसी सों छीन छाम को।
नाम-नरेस-प्रताप प्रबल जग, जुग-जुग चालत चाम को ॥४॥
शब्दार्थ—पतंग = पक्षी (जटायु, काक-भुशुंडि)। आदिकवि = वाल्मीकि। बाजिमेध =
-अश्वमेध। साम = सामवेद। छाम = पतला।
भावार्थ—गरीबोंको निहाल करना ही श्रीरामजीका बाना है। वेद, पुराण,
शिवजी, शुकदेवजी आदि यही गाते हैं, और उनके नामका प्रभाव तो प्रत्यक्ष
है ही ॥१॥ ध्रुव, प्रह्लाद, विभीषण, सुग्रीव, जड़ (यमलार्जुन, अहिल्या आदि),
पक्षी (जटायु, काकभुशुंडि), पाँचो पांडव और सुदामा इन सबको भगवान्ने
इस लोकमें सुन्दर यश और परलोकमें मोक्ष दिया है। इनमें श्रीरामजीके कामका
कौन है ! (अर्थात् इन लोगोंकी ओर ध्यान न देनेसे रामजीका कुछ न
बिगड़ता) ॥२॥ गणिका, कोल-किरात (गुह, निषाद आदि) तथा आदिकवि
महर्षि वाल्मीकि आदिसे बुरा कौन था? अजामिलने कब अश्वमेध यज्ञ किया
था, और गजेन्द्रने कब सामवेद गाया था ? ॥३॥ तुलसीके समान छली, मलिन,