सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariAwadhipublished475 पृष्ठ

पृष्ठ 140, कुल 475 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 140

विनय-पत्रिका १२९
स्याम नव तामरस-दामद्युति वपुष, छवि-
कोटि मदनार्क अगनित प्रकासं ।
तरुन रमनीय राजीव-लोचन ललित,
वदन राकेस, कर-निकर हासं ॥२॥
सकल सौंदर्य-निधि, विपुल गुनधाम, विधि-
वेद-बुध-संभु-सेवित, अमानं ।
अरुन पदकंज-मकरंद मंदाकिनी,
मधुप-मुनिवृंद कुर्वन्ति पानं ॥३॥
सक्र-प्रेरित घोर मदन मद-भंगकृत
क्रोधगत, बोधरत, ब्रह्मचारी ।
मारकंडेय मुनिवर्यहित कौतुकी,
बिनहि कल्पांत प्रभु प्रलयकारी ॥४॥
पुन्य बन सैलसरि बदरिकाश्रम, सदा-
सीन पद्मासनं, एक रूपं ।
सिद्ध-योगीन्द्र-वृन्दारकानन्दप्रद,
भद्रदायक दरस अति अनूपं ॥५॥
मान मनभंग, चितभंग मद, क्रोध
लोभादि पर्वत दुर्ग, भुवन-भर्त्ता ।
द्वेष-मत्सर-राग प्रबल प्रत्यूह प्रति,
भूरि निर्दय, क्रूर-कर्म-कर्त्ता ॥६॥
विकटतर वक्र छुरधार प्रमदा, तीव्र
दर्प कंदर्प खर खङ्गधारा ।
धीर-गंभीर-मन-पीर-कारक, तत्र
के वराका वय विगत सारा ॥७॥
परम दुर्घट पंथ, खल-असंगत साथ,
नाथ, नहिं हाथ वर विरति-यष्टी ।
दर्सनारत दास, त्रसित माया-पास,
त्राहि हरि, त्राहि हरि, दास-कष्टी ॥८॥
९