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सर्वकोश
वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara by Sadananda Yogindra

सदानन्द योगीन्द्र द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished145 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 145 में से

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पृष्ठ 6

( ६ ) वेदान्तसार ।
बुद्धिमनतिक्रम्य वक्ष्ये प्रतिपादयिष्ये इत्यर्थः ॥ २ ॥
( भा०टी० ) जिनको कदापि द्वैतभान नहीं होयहै ऐसे
अद्वैतस्वरूप अद्वयानन्दनामवाले गुरुदेवको नमस्कार कर-
के वेदान्तशास्त्रका सारभूत "वेदान्तसार" नामक ग्रन्थ-
को बनाताहूँ ॥ २ ॥
वेदान्तो नाम उपनिषत्प्रमाणम् ॥ तदुप-
कारीणि शारीरकसूत्रादीनि च ॥ ३ ॥
( सं०टी० ) इदानीं सर्वस्यापि वस्तुविचारस्योद्देशपूर्वक-
त्वात्प्रतिज्ञातं वेदांतं नामतो निर्दिशति । वेदान्त इति । उपनि-
षद एव प्रमाणमुपनिषत्प्रमाणं उपनिषदो यत्र प्रमाणमिति वा।
तदुपकारीणि वेदांतवाक्यसंग्राहकाणिशारीरकसूत्रादीनि"अ-
थातो ब्रह्मजिज्ञासा" इत्यादीनि सूत्राणि।आदिशब्देन भगवद्गी-
ताद्यध्यात्मशास्त्राणि गृह्यंते।तेषामप्युपनिषच्छब्दवाच्यत्वादि-
ति भावः ॥ ३ ॥
( भा०टी० ) स्वतःसिद्ध प्रमाणस्वरूप उपनिषदोंका ना-
म वेदान्त है तथा प्रमाणस्वरूप उपनिषदोंके अनुकूल जो
मीमांसारूप शारीरक सूत्रको आदिले अध्यात्मशास्त्र हैं वे
भी वेदान्त नामसे कहे जाते हैं ॥ ३ ॥
अस्य वेदान्तप्रकरणत्वात्तदीयैरेवानुबन्धै-
स्तद्गतासिद्धेर्न ते पृथगालोचनीयाः ॥४॥
( सं०टी० ) ननु यद्यप्यवांतरानुबंधचतुष्टयमापाय नि-