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वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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पृष्ठ 59

ि? No, म सि- wait, is itपृष्ठमसि? Wait, look at मand thenसि: Wait, look at मसिinअग्निचयनविधानस्य: the सhas a left curve. Here, afterम, there is सिorभि? Wait, अपां पृष्ठमसिis the famous mantra for the lotus leaf (puṣkara-parṇa) in Agnicayana: "अपां पृष्ठमसि..." (Śatapatha Brāhmaṇa 7.3.2.14: 'अपां पृष्ठमसि' इति पुष्करपर्णमुपदधाति). Wait, in the print: is it'अपां पृष्ठमसि'ति? Let's look at the character: पृ ष्ठ म सि ’ तिWait, there isम, then सि! The सिis slightly merged withमor justमसि! Yes, 'अपां पृष्ठमसि'ति`!

Line 57:
पर्णमुपधाय तस्योपरि अग्नेश्चयनं कर्तव्यम् । तेन तदात्मकेऽमृते अर्चि-
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र्मये आदित्ये अयमुपासिता स्वीयमात्मानं वेदत्रयरूपं चित्याग्निरूपं
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