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वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

पृष्ठ 199, कुल 237 में से

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पृष्ठ 199

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Line 10:
"सिद्धान्तिनैयायिका, मीमांसका वेदान्तिनश्च ।"

Line 12:
"तदर्थमुद्भावयन्ति अंशानाक्षेपांर्हान् तथापि"
Wait, look at "अंशानाक्षेपांर्हान्":
Is that an anusvara on 'पा'?
Wait, the repha is on 'हा': 'र्हा'. Before 'र्हा', there is a small dot above 'पा': 'पांर्हान्' or is it just the repha's tail?
The repha starts above 'हा' and curves left. Sometimes that curve looks like a dot. But let's look: "अंशानाक्षेपार्हान्" (अंशान् + आक्षेपार्हान् -> अंशाननाक्षेपार्हान्? No, "अंशानाक्षेपार्हान्").

Line 16:
"सिद्धान्तित्वे उपक्षतं कोटिप्रकोटयः सम्यग् विस्तरेण"
Wait, is it "उपक्षतं" or "उपेक्ष्य"?
Let's read: 'उ' 'प' 'क' '्' 'ष' 'त' 'ं' -> "उपक्षतं" or "उपक्षिताः"?
Wait: "सिद्धान्तित्वे उपक्षतं कोटिप्रकोटयः" or "उपक्षिप्तं"?
Wait