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सर्वकोश
वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

पृष्ठ 180, कुल 237 में से

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पृष्ठ 180

):
"ननु विरुद्धार्थाभिनिवेशापस्मारलक्षणाया अविद्याया माहात्म्यात्सम्भव इति चेत्; स्वस्ति सर्वज्ञत्वाय भूयिष्ठाऽविद्यापस्माराय। वरं कनीयोऽविद्यमेकदेशदर्शित्वमेव।"
YES! "विरुद्धार्थाभिनिवेशापस्मारलक्षणाया"!
Wait, look at the letters in L53:
"ननु विरु"
Wait, does it say "विरुद्धार्थावभावेऽर्थग्रहाभिनिवेश..."?
Wait, look at the characters:
वि-रु-द्ध-त्वा-भा-वे-ऽर्थ-ग्र-हा-भि-नि-वे-शा-प-स्मा-र
Wait! Is it "विरुद्धत्वाभावेऽर्थग्रहाभिनिवेशापस्मारलक्षणाया"?
Yes! The letters are literally:
वि (vi) रु (ru) द्ध (ddha) त्वा (tvā) भा (bhā) वे (ve) ऽ (avagraha) र्थ (rtha) ग्र (gra) हा (hā) भि (bhi) नि (ni) वे (ve) शा (śā) प (pa) स्मा (smā) र (ra) ल (la) क्ष (kṣa) णा (ṇā) या (yā)
The typesetter printed: "ननु विरुद्धत्वाभावेऽर्थग्रहाभिनिव