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सर्वकोश
वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 248 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 15

कामसूत्र की
विषयानुक्रमणिका
पृष्ठाङ्क
१. साधारण नाम प्रथममधिकरण
प्रथम अध्याय १-५
शास्त्रसंग्रह प्रकरण—मंगलाचरण, कामशास्त्र की प्राचीनता और प्रामाणिकता,
कामशास्त्र की परम्परा, 'कामसूत्र' की रचना का उद्देश्य, 'कामसूत्र' की विषयवस्तु।
द्वितीय अध्याय ५-१०
त्रिवर्गप्रतिपत्तिप्रकरण—कालविभाग, विद्यार्जनकाल में ब्रह्मचर्य आवश्यक, धर्म का
स्वरूप और उसका उपाय, अर्थ का स्वरूप और उसका उपाय, काम का स्वरूप और उसका
उपाय, मोक्ष का स्वरूप, कामशास्त्र की आवश्यकता, कामशास्त्र का प्रयोजन, त्रिवर्ग के
आचरण की आवश्यकता पर शङ्का, त्रिवर्ग सेवन का फल।
तृतीय अध्याय १०-१६
विद्यासमुद्देश प्रकरण—'कामसूत्र' का अध्ययनकाल, विद्याएँ, स्त्रियों के लिये
कामशास्त्रीय शिक्षा, स्त्रियों के लिये कामशास्त्रानुशीलन की रीति, कन्या के विश्वस्त आचार्य,
कामशास्त्र की अङ्गभूत चौंसटकलाएँ, कलाओं की संख्या और स्वरूप, कलाओं का वर्गीकरण,
कलाज्ञान का फल, पुरुषों को कलाज्ञान का लाभ।
चतुर्थ अध्याय १६-२२
नागरकवृत्तप्रकरण—प्रकरणसम्बध, नागरक का वास, गृहसज्जा, शैय्या, शृंगार-
प्रसाधन, वीणा, आलेख्य, वृक्षवाटिका, दीर्घिका और क्रीडापर्वत, हिंडोला, क्रीडापक्षी,
दिनचर्या, प्रातः अभ्युत्थान, दन्तधावन, शरीर-संस्कार, स्नान, केशकर्तन, मालिश, केशतैल,
भोजनकाल, भोजनानन्तर व्यापार, रात्रिचर्या, अभिसारप्रसंग, परिचरण, नैमित्तिक कृत्य,
घटानिबन्धन, मदनोत्सव, गोष्ठीसमवाय, समापानक, उद्यानविहार, समस्याक्रीड़ा, यक्षरात्रि,
कौमुदीजागर, सुवसन्तक, एकचर्या, उपनागरकवृत्त, विट, विदूषक, कुट्टनी, ग्रामवासी नागरक,
गोष्ठी में भाषाप्रयोग, त्याज्यगोष्ठी, प्रशस्तगोष्ठी।
पञ्चम अध्याय २२-२७
नायकसहायदूतकर्मविमर्शप्रकरण—नायिका का अन्तर्भाव, अनुलोम-प्रतिलोम,
पुनर्भू, नायिकाविचार, विधवा, परिव्राजिका, वेश्यापुत्री, कुलीन युवती, नायिकाविमर्श,