सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 14, कुल 248 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 14

१० वात्स्यायन-कामसूत्र
या मुनीन्द्र शब्द का प्रयोग किया है और उनके मत को मुनिमत या मुनिगिरा भी कहा है।
परवर्ती आचार्यों ने ‘रतिरहस्य’ के मार्ग का ही अवलम्बन किया है और बौद्धभिक्षुक
श्रीपद्मश्री रचित ‘नागरसर्वस्व’ कल्याणमल्ल कृत ‘अनङ्गरङ्ग’, ज्योतिरीश्वर कृत ‘पञ्चसायक’
आदि ग्रन्थों में प्रायः ये ही विषय लिखे गये हैं।
कहने का आशय यह है कि ‘कामसूत्र’ ऐसा असाधारण ग्रन्थ है जो अपनी गुरुता
एवं गम्भीरता से न केवल पूर्ववर्ती ग्रन्थों को आभाविहीन कर देता है, अपितु परवर्ती ग्रन्थों
को भी गौरवान्वित नहीं होने देता। यह सहस्रों वर्षों से आज तक सुशिक्षित एवं सुसंस्कृत
मानवजाति के हृदय पर अधिकार किये हुए हैं।
हमने इस कामसूत्र का, जयमङ्गला संस्कृत टीका के साथ, विस्तृत हिन्दी अनुवाद
भी किया है। आवश्यकता पड़ने पर, पाठकगण उसका उपयोग भी कर सकते हैं।
कृष्णदास अकादमी के नियामक श्रीकमलेशकुमारजी गुप्त और चौखम्बा संस्कृत
सीरीज आफिस के संचालक श्रद्धेय श्री ब्रजमोहनदास जी गुप्त ने विशेष रुचि लेकर इस ग्रन्थ
को अल्पावधि में प्रकाशित कर जनताजनार्दन तक पहुँचाया है, अतएव वे आभार के पात्र
हैं। मैं उनकी नित्य नवीन उन्नति की कामना करता हूँ।
विनीत—
रामानन्द शर्मा
रीडर हिन्दी विभाग
हिन्दू कालेज, मुरादाबाद-२४४ ००१