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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 97, कुल 530 में से

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पृष्ठ 97

विषयानुक्रमणिका
पृ०सं०
दो शब्द ५-९
प्राक्कथन ११-८४
उपोद्घात
१. भास्करराय और उनका आविर्भाव काल १२
२. भास्करराय की रचनाएँ १४
३. भास्करराय का जीवन-परिचय १५
४. भास्करराय की दार्शनिक दृष्टि २१
५. ‘वरिवस्यारहस्यम्’—एक विहंगमावलोकन २६
प्रथमोऽंशः
विषय श्लो० पृ०सं०
ग्रन्थकार का भगवान् नृसिंह से उनकी भक्ति-प्राप्ति
हेतु निवेदन १ १
ग्रन्थकार का विद्योपासक विद्वत्समाज के प्रति
आत्मनिवेदन २ २
प्रकाशस्वरूप परमशिव की महत्ता ३ ३
विमर्श शक्ति और उसकी महत्ता ४ ११
‘परिणामवाद’ एवं चतुर्विधा सृष्टि ५ २८
विमर्श शक्ति के परिज्ञान के उपाय ६ ६६
गायत्री के दो रूप ७ ७०
श्रीविद्या की गोपनीयता ८ ७६
कूटत्रय का स्वरूप ९-११ ८०
हल्लेखा का स्वरूप १२ ८९
नाद और उसका स्वरूप १३ ८९