वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)
Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary
भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा
पृष्ठ 78, कुल 530 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ वरिवस्यारहस्ये
है वहीं साधक को ले जाना भी चाहता है—यदि साधक उस गन्तव्य लक्ष्य से
अवगत हो जाय तो साधक को अपनी यात्रा में सुविधा हो जाती है ।
योगदर्शन में ‘मन्त्रार्थभावना’ को ही ‘जप’ की आख्या दी गई है और
इसीलिए कहा गया है—‘तज्जपस्तदर्थ भावनम् । ‘भावना देना’ आयुर्वेद में भी
विशेषार्थ में प्रयुक्त है ।
‘बीजमन्त्रों’ के कतिपय उदाहरण अर्थ सहित नीचे लिखे हैं—
१. ‘हौं’ = प्रसाद बीज । ‘ह’ = शिव । औकार = सदाशिव । ‘बिन्दु’ =
दुःख का हरण ।। ‘हौं’ बीज का अर्थ—‘‘शिव एवं सदाशिव की अनुकम्पा एवं
प्रसाद से मेरे समस्त दुःख नष्ट हो जायँ ।।’’
२. ‘ह्रीं’ = ‘ह’ = शिव । ‘र’ = प्रकृति । ‘ई’ = महामाया । ‘नाद’ =
विश्वाम्बा । ‘बिन्दु’ = दुःखहरण । इस शक्तिबीज या मायाबीज का अर्थ = ‘‘शिव
समवेत विश्वाम्बा महामाया शक्ति मेरे दुखों का नाश करें ।’’
३. ‘श्रीं’ = श = महालक्ष्मी । र = धन । ई = तुष्टि । नाद = विश्वजननी
लक्ष्मीबीज (श्रीबीज) का अर्थ = ‘‘धन-वैभव, तुष्टि-पुष्टि की अधिष्ठात्री माता
महालक्ष्मी मेरे दुःखों का नाश करें ।।’’
४. ‘‘क्लीं’’ = क = कृष्ण या काम । ल = इन्द्र । ई = तुष्टि । बिन्दु =
सुखप्रद । इस कृष्णबीज या कामबीज का अर्थ = मन्मथ-मन्मथ श्रीकृष्ण सुख एवं
शान्ति दें ।
५. ‘हूँ’ = ह = शिव । अ = भैरव । नाद = सर्वोत्कृष्ट । बिन्दु =
दुःखहारी ।। इस वर्मबीज या कूर्चबीज का अर्थ = श्रेष्ठतम असुरों के लिए भयङ्कर
भगवान शिव मेरे दुःखों का नाश करें ।
६. ‘क्रीं’ = क = काली । र = ब्रह्म । ई = महामाया । नाद =
विश्वजननी ।। बिन्दु = दुःखहारक ।। इस कालीबीज या कर्पूरबीज का अर्थ =
‘ब्रह्मशक्तिस्वरूपिणी महामाया काली माता मेरे दुखों का नाश करें ।।
७. ‘दूं’ = द = दुर्गा । अ = रक्षा । बिन्दु = करो ।। दुर्गाबीज (दूँ) का
अर्थ = ‘हे माँ दुर्गे ! मेरी रक्षा करो ।।’
८. ‘ऐं’ = ऐ = सरस्वती । बिन्दु = दुःख का हरण । सरस्वतीबीज =
‘देवी सरस्वती मेरे दुःखों का नाश करें’—यही अर्थ है सारस्वत बीज का ।
९. ‘ग्लौं’ = ग = गणेश । बिन्दु = दुःखहरण । औ = तेज । ल =
व्यापक । गणेशबीज का अर्थ—‘परमव्यापक ज्योतिर्मय भगवान गणेश मेरे दुःखों
का नाश करें ।।’
‘स्त्रीं’ = स = दुर्गोत्तरण । त = तारक । र = मुक्ति । ई = महामाया ।
नाद = विश्वमाता । बिन्दु = दुःखहरण । वधूबीज का अर्थ—‘‘दुर्गोत्तारिणी