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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 505, कुल 530 में से

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पृष्ठ 505

, त्+वा. Wait, what if it is मामकमप्याभिन्नम्? No, it's definitely त्. Wait, let's look at the letter before भिन्नम्: मामक-म-त्-म? Or मामक-म-त्-या? Wait, could it be मामकमन्त्राभिन्नम्? No, no 'न'. Could it be मामकमत्याभिन्नम्`?
Let's look at the Hindi explanation below to see if it explains this word!
Let's read the Hindi text:
इस श्लोक में निम्न शब्द विशिष्टार्थक हैं अतः प्रथमतः उन पर ही प्रकाश
डाला जा रहा है—
'अकथासनं', 'हलक्षान्तर', 'गुरुचरण:'—गुरु का स्थान 'सहस्रार'
(ब्रह्मरंध्रसरसीरुह) के भीतर विद्यमान श्वेत वर्ण के बारह दलों से युक्त 'द्वादशदल
कमल' में है और इसीलिए भगवान् शिव ने इसका निरतिशय महत्त्वाङ्कन करते हुए
कहा है—
...
'पादुका पंचक' में “अ” “क” “थ” रेखाओं एवं गुरुचरणों के