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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 480, कुल 530 में से

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३७८ वरिवस्यारहस्ये

'पंचदशी मंत्र''गायत्रीमंत्र'
'ह्रीं' का अर्थ है ॐ'परोरजसेऽसावदोम''ह्रीं' एवं 'ओम'
यह देवी प्रणव है(रजातीत, अवद ओम्) ॥दोनों ही प्रणव
'ह्रीं' प्रणवार्थः परतत्त्वमकारो'ओम'हैं एवं
कारमकारैर्ब्रह्मविष्णु रुद्रात्मकम् ।(ब्रह्मविष्णुरुद्रात्मक)समानार्थक हैं ।
एवावान्तरार्थो हृल्लेखायाः ॥
(ब्रह्मविष्णुरुद्रात्मक)
  • सरोजिनी *
    'महावाक्यार्थ' का स्वरूप—आचार्य भास्करराय का कथन है कि जीव एवं
    ब्रह्म में अभिन्नता एवं अभेदात्मकता की, तार्किक पुष्टि द्वारा, स्थापना करना ही
    महावाक्यार्थ का आशय है ।
    'योगिनीहृदय' में महावाक्यार्थ नामक अर्थ का तो उल्लेख नहीं है प्रत्युत्
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