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वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 408, कुल 530 में से

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पृष्ठ 408

३०६ वरिवस्यारहस्ये
'ऐ' = विश्वयोनि = १४ भुवन = चतुर्दशार = विशुद्ध ।
'अर्धचन्द्र' = अष्टदल पद्म ।
'स' = सोममण्डल = षोडशदल पद्म ।
'बैन्दवस्थान' = वृत्त = त्रिवृत्त = चन्द्रमण्डल ।
'ह' = शिवस्थान = चतुष्कोण = भूपूर = सहस्रार ।
पंचदशाक्षरी विद्या, नित्या, तत्त्व, खण्ड एवं यंत्रों में ऐक्य—

मंत्रतिथिवैदिक नामनित्यायेंतत्त्वखण्डयंत्र के भाग
क१दर्शाकामेश्वरीशिवअग्नित्रिकोण
ए२दृष्टाभगमालिनीशक्तिअग्निअष्टार
ई३दर्शतानित्यक्लिन्नामायाअग्निअन्तर्दशार
ल४विश्वरूपाभेरुण्डाशुद्धविद्याअग्नि
ह्रीं५सुदर्शनावह्निवासिनीजलसौरबहिर्दशार
ह६आप्यायमानामहावज्रेश्वरी या विघ्नेश्वरीतेजसौरबहिर्दशार
स७आप्यायमानाशिवदूती-रौद्रीवायुसौरचतुर्दशार
क८आप्यायात्वरितामनसौरचतुर्दशार
ह९सूनृताकुलसुन्दरीपृथ्वीसौर
ल१०इरानित्याआकाशसौर
ह्रीं११आपूर्यमानानीलपताकाविद्यासौर
स१२आपूर्यमानाविजयामहेश्वरचन्द्रशिव के चार चक्र
क१३पूर्यन्तीसर्वमङ्गलापरतत्त्वचन्द्रशिव के चार चक्र
ल१४पूर्णाज्वालामालिनीआत्मतत्त्वचन्द्रशिव के चार चक्र
ह्रीं१५पौर्णमासीचित्रा, चिद्रूपासदाशिवचन्द्रशिव के चार चक्र
श्रीं१६चिद्रूपा (अमावस्या)महात्रिपुरसुन्दरीसादाख्यचन्द्रकलानित्याकला