वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)
Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary
भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा
पृष्ठ 345, कुल 530 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वितीयोऽंशः २४३
व्यापकता के तारतम्य में वाकचतुष्ट्य
पश्यन्तीवाक्
शक्ति → शिव
(विमर्श) (प्रकाश)
मध्यवाक्
बैखरीवाक् परावाक्
प्रकाशांश एवं निष्पत्ति
विमर्शांश का वाकचतुष्ट्य
सामरस्य
चिद्रश्मि (चेतनावाक्)
↓ ↓
प्रकाशांश अम्बिका परावाक् १. अम्बिका + शान्ता → 'परावाक्'
विमर्शांश शान्ता (मूलाधारस्थ)
चिद्रश्मि ↗ ↓ ↓
चिद्रश्मि (चेतनावाक्)
↓ ↓
प्रकाशांश वामा पश्यन्तीवाक् २. वामा + इच्छा → 'पश्यन्तीवाक्'
विमर्शांश इच्छाशक्ति (नाभिस्थ)
चिद्रश्मि ↗ ↓ ↓
चिद्रश्मि (चेतनावाक्)
↓ ↓
प्रकाशांश ज्येष्ठा मध्यमावाक् ३. ज्येष्ठा + ज्ञानशक्ति → 'मध्यमावाक्'
विमर्शांश ज्ञानशक्ति (अनाहत चक्रस्थ)
↓ ↓
चिद्रश्मि ↗ अचेतनवाक्, जड़वाक्,
मृतवाक्, क्षरवाक्, सुषुप्तवाक्
↓ ↓
प्रकाशांश रौद्री वैखरीवाक् ४. रौद्री + क्रियाशक्ति → 'बैखरीवाक्'
विमर्शांश क्रियाशक्ति (कण्ठगत जिह्वागत)
चिद्रश्मि ↗
चिद्रश्मि-शून्य चित्प्रकाश
विरहित = जड़वाक्