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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 339, कुल 530 में से

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पृष्ठ 339

द्वितीयोंऽशः २३७
| 'ल्'—भूमण्डल मेवोक्तं | 'महि' । 'भर्गोदेवस्य | 'ल' 'लं' एवं मही |
| लकारेण (श्रुति) (अर्थात् | धीमहि' का 'महि' । | दोनों पृथ्वी वाचक हैं । |
| महनीया पृथ्वी = पृथ्वी | अर्थ = पृथ्वी | |
| तत्व का बीजाक्षर 'लं') | | |
| = भूमण्डल 'ल' | | |
| ह्रीं (माया बीज) | (गायत्री का चतुर्थ | |
| | चरण) | |
| | 'परोरजसे सावदोम्' | |
'सवितुर्वरेण्यं' = 'ए' ॥ 'सवितुः' = (गा०मं०) प्राणिप्रसवकारण । योनि ।
सविता + वरेण्य = कामेश्वरी । 'ए' = कामेश्वरी ।
'क' = कामेश्वर । 'कं ब्रह्म' । 'तत्' (गायत्री मन्त्र) = ब्रह्म ॥ 'ॐतत्
सदिति' 'धी'—जगदाधार—'दधत्, धत इति धीः ॥ 'धरोधोत्येवं धार्यते ।' (श्रुति) ।
'वरेण्यं' (गा०मं०) श्रेष्ठ । भजनीय । 'धयो यो नः प्रचोदयात्' का अर्थ है—हम
लोगों की 'धी' (बुद्धि) को ध्यानातीत वस्तु, निष्प्रपञ्च विषयों में प्रेरित करें ॥
अर्थात् परात्परतत्त्व विषयक ज्ञान को प्राप्त करने हेतु प्रेरणा प्रदान करें ।
'तुरीयांघ्रिः' = गायत्री का 'परोरजसे सावदोम्' पद है । 'क' = 'कं ब्रह्म' =
ब्रह्म ॥
'क' = 'कामयते कामी जायते स एव निरञ्जनोऽकामत्वेनोज्जृंभते कामोऽभि-
धीयते तपरिभाषायां कामः ककारं व्याप्नोति' (श्रुति) 'क' = कामेश्वर ॥ 'तत्' =
तदिति ब्रह्म शाश्वतम्' (श्रुति) 'ॐतत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः ॥ (गीता)
"सवितुर्वरेण्यम्" = 'श्रेष्ठ भजनीय योनि', जगत् का मूल एवं श्रेष्ठ कारण
= अर्थात् कामेश्वरी ॥
मन्त्र द्वय की समतुल्यता एवं समानार्थकता
| पञ्चदशाक्षरी मन्त्र | गायत्री मन्त्र |
| क ए ई ल ह्रीं, ह स क ह ह्रीं, | “ॐ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो |
| स क ल ह्रीं | देवस्य धीमहि धियो यो नः |
| | प्रचोदयात्” |
| प्रथमकूट | |
| १. 'क' (कामनाओं को पूर्ण करने | 'तत्' = ब्रह्म ॥ 'ॐ तत् सदिति' |
| वाला = कामेश्वर) परमात्मा ॥ | |
| २. 'ए' = सरस्वती । त्रिकोण = | 'सवितुर्वरेण्यम्' जीवों की उत्पत्ति करने |
| एकार = (कामेश्वरी) कामेश्वरी 'त्रिकोण | वाली श्रेष्ठ कामेश्वरी ॥ |