वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)
Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary
भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा
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भास्कराचार्य के अनुसार मन्त्र-जप का स्वरूप
परब्रह्म
शब्दातीत स्तर
'शब्द ब्रह्मणि निष्णातः परब्रह्माधिगच्छति'
← ध्वन्यात्मक नाम (मन्त्र)
ध्वन्यात्मक मन्त्र (नाद)
परावाक् (शब्द ब्रह्म) चेतन शब्द
पश्यन्ती वाक्
मध्यमा वाक्
मन्त्र के अङ्ग = 'नाद' (९ नादों की समष्टि = 'नाद'):
उन्मना
↑
समना
↑
व्यापिका
↑
शक्ति
↑
नादान्त
↑
नाद
↑
निरोधिका
↑
अर्धचन्द्र
↑
बिन्दु
पिण्डस्थ चक्र:
आज्ञाचक्र
↑
विशुद्धाख्यचक्र
↑
अनाहतचक्र
↑
मणिपूरचक्र
↑
स्वाधिष्ठानचक्र
↑
मूलाधारचक्र
मन का यन्त्र के साथ ऐक्य
मन का मन्त्र के साथ ऐक्य
मन का आत्मा के साथ ऐक्य
मन का गुरु के साथ ऐक्य
मन का देवता के साथ ऐक्य
मन का देवी के साथ ऐक्य
मन का मन्त्रार्थ के साथ ऐक्य
मन का नाद के साथ ऐक्य
मन का शून्य के साथ ऐक्य
मन का अवस्थाओं के साथ ऐक्य
मन का विषुवों के साथ ऐक्य
मन का चक्र के साथ ऐक्य
मन का प्राण के साथ ऐक्य
वर्णात्मक मन्त्र
बैखरीगत मन्त्र
(जड़ शब्द)
जप के विभिन्न स्तर:
निस्पन्द निःशब्द (परब्रह्म)
सस्पन्द | शब्दब्रह्म | सशब्द
↑
परावाक्
↑
पश्यन्ती
↑
मध्यमा
↑
वैखरी
↑
↑
↑
वैखरी विश्व विग्रहा → विश्व
ऊर्ध्वारोहण का स्तर
जप के विभिन्न स्तर →
अजपा जप
मानस जप
उपांशु जप
वैखरी जप
मन्त्र
↑
नाद
↑
वर्णोच्चारण