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वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 286, कुल 530 में से

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पृष्ठ 286

१८४ वरिवस्यारहस्ये
'ज्ञानभूमिः शुभेच्छास्यात्प्रथमा समुदीरिता ।
विचारणा द्वितीया तु, तृतीया तनुमानसा ।
सत्त्वापत्तिश्चतुर्थी स्यात्ततोऽसंसक्तिनामिका ।
पदार्थभावना षष्ठी सप्तमी तुर्यगास्मृता ॥'
'तुरीयगा' का स्वरूप क्या है?
यत्र नासन्त सद्गूपो, नाहं नाप्य न हंकृतिः ।
केवलं क्षीणमनन आस्तेऽद्वैतेडित निर्भयः ॥
अन्तः शून्यो बहिः शून्यः शून्य कुंभइवाम्बरे ।
अन्तः पूर्णो बहिः पूर्णः पूर्ण कुंभ इवार्णवे ॥ १८ ॥
मा भव ग्राह्यभावात्मा ग्राहकात्मा च मा भव !
भावना मखिलां त्यक्त्वा यच्छिष्टं तन्मयो भव !
द्रष्टृदर्शनदृश्यानि त्यक्त्वा वासनया सह ।
दर्शन प्रथमाभासमात्मानं केवल भज ॥१
बिन्दु कुण्डलिनी
┌───────────┼───────────┐
वह्नि सूर्य सोम
कुण्डलिनी कुण्डलिनी कुण्डलिनी
┌ ○ महाबिन्दु ┌ ई ┐ स्वप्न महाबिन्दु
│ ० ◡ उन्मनी │ रं ┘ जागर ↓
│ ० समना ┌ ह ┐ उन्मनी
│ । │ ल │ भूमि ↓
तुर्यातीतावस्था │ ▽ ◡ व्यापिका │ क │ विष्णु समना
│ ० │ स ┘ भारती ↓
│ ०० शक्ति └ ह्रीं व्यापिका
│ ०|◡ नादान्त ┌ ल ┐ ब्रह्मा ↓
│ ┌ ह │ भूमि ┐ शक्ति
│ ०|० नाद │ क │ विष्णु │ स्वप्न तुर्यातीतावस्था ↓
तुर्यावस्था │ ▽ ◡ रोधिनी │ स │ भारती │ नादान्त
│ │ ह ┘ ब्रह्मा │ ↓
│ ◡ अर्धचन्द्र └ मिथुनम् │ नाद
┌─┴─ ⸗ ◡ बिन्दु ┌ ह्रीं रुद्राणी │ ↓
सुषुप्ति └─┬─ │ रुद्र ┘ तुर्यावस्था रोधिनी
│ ल ┐ विष्णु ↓
│ ई │ भूमि अर्धचन्द्र
│ ए │ भारती सुषुप्ति ┌─ ↓
└ क ┘ ब्रह्मा └─ बिन्दु
१. वराहोपनिषद