वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)
Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary
भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा
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आदिनाद = आदि मन्त्र
"ॐ" शब्दब्रह्म परावाक्
[चित्र विवरण:]
ॐ
नाद
↓
बिन्दु
↓
जगत्
कुण्डलिनी का फूत्कार
कुण्डलिनी — [सर्पाकार वलय]
कुण्डलिनी के ३ वलय — स्वयंभू लिङ्ग
मूलाधार चक्र त्रिकोण
[दाहिनी ओर प्रवाह:]
प्राणापान का आघात
↓
कुण्डलिनी का जागरण
↓
फूत्कार
महाबिन्दु का विस्फोट | सप्तपदी नाद | सहस्रारचक्र में
↓ | ↓ | (अव्यक्त नाद)
मूलाधार चक्र में = परावाक् | शून्य | ↓
नाभि से नीचे | ↓ | आज्ञा चक्र में
↓ | संवित् | (ॐ)
| ↓ | ↓
नाभि = पश्यन्ती वाक् | सूक्ष्मा | ५२ मातृकाएँ
↓ | ↓ |
हृदय = मध्यमा वाक् | परा |
↓ | ↓ |
कण्ठ = वैखरी वाक् | पश्यन्ती |
↓ | ↓ |
जिह्वादि उच्चारण स्थान = वर्णमाला | मध्यमा |
| ↓ |
| वैखरी |
वाक्
↓
┌───────────────────────┴───────────────────────┐
निस्पन्द वाक् सस्पन्द वाक्
↓ ↓
परा वाक् ┌───────────────┴───────────────┐
मध्यमा वाक् वैखरी वाक्