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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 230, कुल 530 में से

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१२८ वरिवस्यारहस्ये
दीपिकाकार कहते हैं—'बिन्दोः प्रस्पन्दसंविदः बिन्दुरग्नीषोमात्मकः कामाख्यो रविः
शिवशक्तिसामरस्य वाच्यात्मा जातः ।।१' 'कामकला' चक्ररूपात्मक भी है—'चक्रं
कामकलारूपं प्रसार परमार्थतः ।।'' 'कामकलाविलास' में कामकला का स्वरूप इस
प्रकार प्रस्तुत किया गया है—'सितशोणबिन्दुयुगलं विविक्त शिवशक्तिसंकुचत्प्रसरम् ।
वागर्थसृष्टिहेतु परस्परानुप्रविष्ट विस्पष्टम् । बिन्दुरहङ्कारात्मा रविरेतन्मिथुनसमसाकारः ।
कामः कमनीयतया कला च दहनेन्दुविग्रहौ बिन्दू । इति 'कामकलाविद्या' देवी
चक्रक्रमात्मिका सेयम् । विदिता येन स मुक्तो भवति महात्रिपुर सुन्दरी रूपा ।।इस
प्रकार 'कामकला' चक्ररूपात्मिका एवं महात्रिपुरसुन्दरीरूपा भी है ।२
(कामकला एवं शाक्त दर्शन)
'कामकला'—पराभट्टारिका भगवती महात्रिपुरसुन्दरी का नामान्तर 'कला कला'
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