वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)
Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary
भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथमोऽंशः ८५
पञ्चदशी मन्त्र में वर्ण-संघटन
वाग्भवकूट : कामराजकूट : शक्तिकूट :
(१८ वर्ण) (२२ वर्ण) (१८ वर्ण)
क(१) + अ(१) + ह(१) + अ(१) + स(१) + अ(१) +
ए(१) + ई(१) + स(१) + अ(१) + क(१) + अ(१) +
ल(१) + अ(१) + क(१) + अ(१) + ल(१) + अ(१) +
ह्रीं(१२) ह(१) + अ(१) + ह्रीं(१२)
ल(१) + अ(१) +
ह्रीं(१२)
६ + १२ = १८ १० + १२ = २२ ६ + १२ = १८
१८ + २२ + १८ = ५८
ह्रींकार में निहित
१२ वर्ण
देवी प्रणव
१. ह ─────────────────────────┐
२. र ─────────────────────────┤
३. ई ─────────────────────────┤
४. बिन्दु ────────────────────────┤
५. अर्द्धचन्द्र ────────────────────┤
६. रोधिनी ──────────────────────┤ ह्रीं
७. नाद────────────────────────┤
८. नादान्त ─────────────────────┤
९. शक्ति ──────────────────────┤
१०. व्यापिका ────────────────────┤
११. समना ─────────────────────┤
१२. उन्मना ─────────────────────┘
'प्रणव' = ओंकार । ओंकार जीवों का प्राण है ।¹
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१. नेत्र तन्त्र