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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 181, कुल 530 में से

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प्रथमोऽंशः ७९
३. 'मानवीविद्या'—ह, स, क, ह, ल, ह्रीं, क ए ई ल ह्रीं, ह स क ह
ल ह्रीं ।
४. 'चान्द्रीविद्या'—ह, स, क, ह, ल, ह्रीं, क, ए, ई, ल, ह्रीं, ह स क
ह ल ह्रीं, स क ल ह्रीं ।
५. 'कौबेरीविद्या'—ह, स, क, ह, ल, ह्रीं, क ए ई ल ह्रीं, ह, स, क,
ह, ल, ह्रीं, स क ल ह्रीं, ह, स, क, ह, ल, ह्रीं ।
६. 'अगस्त्यविद्या'—ह ह स क ह स क ए ल ह्रीं, ह स ह स क ह ल
ह्रीं ।
७. 'नन्दिविद्या'—ह, ह, स क ह स क ए ल ह्रीं, ह स ह स क ह ल
ह्रीं, ह स स क ल ह्रीं ।
८. 'प्रभाकरीविद्या'—क ए ल ह्रीं, ह स क ए ल ह्रीं, ह स ह स क ह
ल ह्रीं, ह स स क ल ह्रीं, ह स स क ल ह्रीं, स क ल ह्रीं ।
९. 'षण्मुखीमुद्रा'—ह्रीं, क्लीं हंसः, क्लीं लं ह्रीं, ह स क ह ल ह्रीं, सोहं
क्लीं हंसः, ह्रीं, हंसः सोहं हंसः । ह्रीं क्लीं हंसः, क्लीं लं ह्रीं, ह स
क ह ल ह्रीं, सोहं क्लीं हंसः ह्रीं हंसः, सोहं हंसः ह स क ए ल ह्रीं
ह स ह स क ह ल ह्रीं ह स स क ल ह्रीं ।
१०. 'वैष्णवी विद्या'—ह स क ए ल ह्रीं, ह स ह स क ह ल ह्रीं, ह स
स क ल ह्रीं, क ए ई ल ह्रीं, ह स क ह ल ह्रीं, क ए ई ल ह्रीं,
ह स क ह ल ह्रीं, स क ल ह्रीं, ह स क ह ल ह्रीं, ह स क ह ल
ह्रीं, स क ल ह्रीं ।
११. आदिविद्या (शक्ति-शिव विद्या)—(१) क ए ई ल ह्रीं (वाग्भवकूट)
(२) ह स क ह ल ह्रीं (कामकूट) (३) स क ल ह्रीं, (शक्तिकूट)
द्वादशविद्यायें—शक्तिशिव विद्या । लोपामुद्रा विद्या । क्रोधमुनिविद्या । मानवी
विद्या । चान्द्री विद्या । कौबेरी विद्या । अगस्त्य विद्या । नन्दि विद्या । प्रभाकरी
विद्या । षण्मुखी विद्या । परमशिव विद्या । वैष्णवी विद्या ॥
श्री विद्या का उपासना क्रम
काली क्रम सुन्दरी क्रम तारा क्रम
(कुण्डलिनी क्रम, (हंस क्रम, (समवरोधिनी क्रम,
कादिविद्या, हादिविद्या, सादिविद्या,
सत्वगुण प्रधान) रजोगुण प्रधान ।) तमोगुण प्रधान)
दश महाविद्यायें—'काली तारा षोडशी च बगला भुवनेश्वरी । धूमा छिन्ना च
मातङ्गी भैरवी कमलात्मिका ॥'