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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 530 में से

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प्रथमोऽंशः ५९

चक्रस्थानपीठदल संख्यावर्णतत्त्व/गुणतत्त्व का रङ्गमण्डल का आकारबीज/वाहनदेवता/वाहनशक्ति/लिङ्ग
१. मूलाधार चक्रपायु-मुष्क के मध्य (रीढ़ के अधोभाग में)कामाख्या पीठ०४व, श, ष, स,पृथ्वी, आकर्षण/गंधपीतवर्णवर्गाकारलं/ ऐरावतब्रह्मा हंसडाकिनी/ स्वयंभू
२. स्वाधिष्ठान चक्रमेरुदण्ड में मेढ़ के ऊपर—०६ब, भ, म, य, र, ल,जल/सङ्कोचन/ रसश्वेतवर्णअर्द्धचन्द्रवं/ मकरविष्णु गरुड़राकिनी
३. मणिपूरचक्रमेरुदण्ड में नाभि के पास—१०ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फतेज/प्रसरण/ रूपरक्तवर्णत्रिभुजरं/ मेषरुद्र वृषभलाकिनी
४. अनाहतचक्रहृदय के पासपूर्णगिरि पीठ१२क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठवायु/गति/ स्पर्शधूम्रवर्णषट्कोणयं/ कृष्णमृगईशकाकिनी/ बाण
५. विशुद्धाख्य चक्रकण्ठ के पासजालंधर पीठ१६अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ऌ, ॡ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अःआकाश/ अवकाश/ शब्दश्वेतवर्णवृत्तहं/ श्वेत हस्तीसदाशिवशाकिनी