वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)
Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary
भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा
DevanagariHindipublished530 पृष्ठ
पृष्ठ 16, कुल 530 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 16
॥ निवेदन ॥
प्रस्तुत 'दुर्गासप्तशती' चित्रमय पुस्तक को सम्पादित करने का अनुष्ठान ...
बड़े समारोह के साथ अपने अभीष्ट के लिए पाठ करते हैं। नित्य ...
ही पाठ करें तो चमत्कारी प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। इसके अतिरिक्त ...
पाठ भी लाभप्रद और फलदायक सिद्ध होता है। इस ग्रन्थ ...
अनुष्ठानपरक प्रणाली के नियम विस्तारपूर्वक बताये गये हैं। श्रद्धावान् साधक ...
से उचित लाभ उठाकर जीवन को धन्य बना सकते हैं। साधक ...
अपना यह कर्तव्य हेतु से विज्ञापित किया कि इसका नित्य-पाठ ...
...। अपनी कठिनाइयाँ मिट कर ...
"अथर्व शीर्ष" नवार्णमन्त्र ...
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