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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 530 में से

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दो शब्द ९
मैं सर्वप्रथम भारतीय मनीषा के अद्भुत चमत्कार, प्रतिभा के मूर्त्तिमान
स्वरूप, साधना की निष्पत्ति, ज्ञान के अभ्रंलिह शिखर, सिद्धि के रत्नाकर एवं
वीणापाणि भगवती के वरद आत्मज आचार्य भास्करराय के पाद-पद्मों में
प्रणिपात करता हुआ उनका सश्रद्ध अभिवादन करता हूँ और अन्त में इस
ग्रन्थ के प्रकाशक एवं चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन के सञ्चालक श्रीवल्लभदास
जी एवं श्रीनवनीतदासजी गुप्त के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ
क्योंकि उन्होंने इस ग्रन्थ को प्रकाशित करने के दुर्वह दायित्व को स्वीकार
करते हुए मुझे अनुगृहीत किया।
विद्वद्वशंवद्
बैढन (जमुआ) सीधी म०प्र० श्यामाकान्त द्विवेदी 'आनन्द'
संवत् २०५५
९.९.१९९७